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स्टडी टेक्निक्स
स्टडी टेक्निक्स
जब हम पढ़ाई करते है तो कई बार कई विषय हमें कठिन लगते है । कभी किसी टॉपिक को समझने में दिक्कत आती है, कभी-कभी हम भूल जाते है, कभी हमारा पढ़ाई में मन नहीं लगता है,कभी हम परीक्षा में लिखकर तो आते हैं, किन्तु अंक कम आते हैं, तो कभी-कभी हम तनाव में आ जाते है। आखिर क्या करे, जिससे की हम हमारे ज्ञान को बढ़ा सके और सहजता के साथ, सरलता से पढ़ाई कर सके एवं अपने ज्ञान में वृद्वि कर सके। इसके लिए वैज्ञानिक हमें कुछ तथ्य बताते है, जो पढ़ाई करने में हमें मदद करते हैं।
(1) पढ़ाई करते वक्त प्रत्येक 40 से 50 मिनिट के पश्चात् एक ब्रेक अवश्य लें। ब्रेक में आप स्ट्रेचेस कर सकते है। योग कर सकते है, घुम सकते है, विश्राम कर सकते है, किसी से बात नहीं करना है पढ़ाई के माहौल से बाहर नहीं आना है। मन को चंचल नहीं होने देना है। हल्का संगीत भी सुन सकते हैं। पानी अवश्य पीए, ब्रेक 5 मिनिट से ज्यादा का ना हो।
(2) पढ़ाई करने वक्त जो भी तथ्य हमें महत्वपूर्ण लगते है, उनके नोट्स बनाए, हाईलाइटर से उन्हे हाईलाइट् करें, विभिन्न कलरों का उपयोग करें, उनके चित्र बनाए चार्ट्स बना सकते है। किसी उदाहरण के द्वारा अपने दैनिक जीवन से जोड़ते हुए मनोरंजक तरीके से उसका एक काल्पनीक चित्र मस्तिष्क में बैठा ले। कठिन उत्तर को पहले सरल करे फिर बिंदूवार उसे याद करें।
हमारा मस्तिष्क कठीन चीजों को नहीं समझ पाता हैं इसलिए हमें कठीन उत्तरों को पहले सरल करना होगा वह चाहे हम हमारें दोस्त की मदद से करें, शिक्षक की मदद से करे या फिर सी.डी. की सहायता से उसे समझने का प्रयास करें। हमारा मस्तिष्क रंगीन वस्तुओं को, बड़ी-बड़ी वस्तुओं को, दैनिक जीवन से हट कर मनोरंजक चीजों को, हमारे जीवन से जुड़ी हुई वस्तुओं को ज्यादा अच्छें से याद रख पाता हैं, अतः हमें पढ़ाई करने वक्त तकनीकों को इस्तेमाल करना होगा। ताकि हम बेहतर तरीके से चीजों को समझ पाएंगे और नए याद करके परीक्षा में अच्छे से लिख पाएॅगें
(3) जब भी पढ़ाई करें जीस समय आप सबसे ज्यादा ऊर्जावान महसूस करते हो उस समय कठीन चीजों को समझने का प्रयास करें। समझ में ना आने पर उसे किसी की सहायता से हल करें। जितनी देर हमने पढ़ाई करी हैं उसका 10 प्रतिशत भाग कुछ अंतराल के बाद रिवीजन के लिए दें रिवीजन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मान लिजिए आपने प्रातः काल में 60 मीनिट पढाई करी है। तो संया काल में 10 मीनिट का रिवीजन अवश्य करें। रिवीजन में आप महत्वपूर्ण बिंदूओं को दुबारा पढ़ सकते है। कुछ प्रश्नों को हल करके देख सकते है। अपने आप को उसे समझा सकते है। इस प्रकार का रिवीजन आपकी समृति को एक स्थाइत्व प्रदान करेगा।
(4) जब कभी भी पढ़ने का मंन ना हो तो लिखने का अभ्यास करें, नोट्स बनायें, रिविजन करें, चाट्स बनायें, अपने स्वयं को टेस्ट लें, बचें हुए कार्यो को पूर्ण करें। कैसे भी करने अपने आप को पढ़ाई में व्यस्थ रखें। थोड़ी देर बाद आपकों पता ही नहीं पड़ेगा और आपका मंन पढ़ाई में लग चुका होगा।
(5) किसी भी कठीन चीज+ को सरल करने का सबसे उत्तम तरीका है, कठीन विषयों को दूसरो को पढाना इससे हमारे आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होती हैं और हमारी कठीन बिन्दू हमें पता लग जाते है। फिर वे हमें जल्दी समझ में आ जातें है।
(6) प्रर्याप्त नींद लें अन्यथा इसका प्रभाव अपकी क्षमता में पढ़ेगा।
(7) भोजन हलका, कम मिर्च मसाले का, बिना तला हुआ, घर का सुपाच्य होना चाहिए। संतुलित भोजन से हमे काफी मदद मिलती हैं। यदि हम स्वस्थ होगे तो हम ज्यादा उत्साह के साथ अपने लक्ष्य की तरह बढ़ पायेंगे।
विघार्थीयों को अपनी उर्जा की बचत करना चाहियें। ज्यादा बोलने से, भविष्य के बारे में सोचने से, भूत काल का प्रश्याताप करने से, मनोरंजन करने से, तर्क वितर्क करने से, ज्यादा लोगो से मिलने से उर्जा केन्द्रीत नहीं हो पाती है। और हम हमारा ध्यान पढ़ाई पर केन्द्रीत नहीं कर पाते है। अतः हल्का संगीत सुनने, शास्त्रीय संगीत सुनने, वाद्य यंत्रों का संगीत सुने, अपनी श्वास-प्ररवास पर ध्यान देना। हम एकाग्रचीत महसूस करेंगे और अधिक उर्जा के साथ पढ़ाई कर सकेंगे।
विधार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन
विधार्थियों के लिए तनाव प्रबंधन
वर्तमान युग में हर व्यक्ति उन्नति करना चाहता है और उन्नति करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करता हैं, कई बार हमारी क्षमताएॅं इतनी अधिक होती है कि हमें अपनी क्षमता के भार जाकर कार्य करना पड़ता है। इसका सकारात्मक पक्ष यह होता है कि हम अपने जीवन में उन ऊचाईयों को छू पाते है जिसका क्षमता हमारे माता-पिता और हमने देखी है, और इसका नकारात्मक रूप यह होता है, कि जब हम कार्य के दबाव को सहन नहीं कर पाते है तब हमें शारीरिक और मानसिक परेशानीयों से गुजरना पड़ता है उन्नति करने के लिए आगे बड़ने के लिए अपने सपनों को सच्च करने के लिए मेहनत तो करना ही पड़ेगी और जो तनाव हम पर हावी होता है उसको उसका प्रबंधन करना होगा, तनाव तो होगा ही तनाव का रहना भी जरूरी हैं नही ंतो हम गैरजिम्मेदार और आलसी हो जाएॅगे। जिस प्रकार से गिटार का तार यदि डिला हो तो उसमें से सही स्वर नहीं निकलेगा जब उसमें उचित मात्रा में तनाव आता है, तभी उसमे से करन प्रिय संगीत के स्वंर उत्पन्न होते है, अतः वेशविकरन के इस दौर में हमे तनाव प्रबंधन के गुण अपने अंदर उतारने होगे। तनाव जितना कार्य करने वाले सोमेशनल में होता हैं, उतना ही तनाव विधार्थियों को भी परेशान करता हैं, विघार्थियों के सामने कई तरह की समस्या होती हैं, पड़ाई में मन नही लगना मन का भटकना याद कि हुई चिजों को भुलना परीक्षा में अच्छे अंकों का आना आत्मविश्वास में कमी होना, किसी विषय में कठनाई महसुस करना, माता पिता की अपेक्षाए ओर भी कई ऐसे मुद्दे होते है जिसमे सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, जिनके कारण विघार्थियों को तनाव महसुस होता हैं इन सभी समस्या से बाहार आने का सबसे पहला मंत्र यह है कि हम अपने आप पर विश्वास रखे विश्वास की ताकत से हम बड़ी से बड़ी जंग जीत जाते है हमारे जीवन के रचेयता हम खुद है, हम जैसा चाहते है वेसा ही हमारे साथ होगा सकारात्मक सोचते हुए हम अपने कार्यो को करते है और जैसा हम सोचते है उसी तरह कार्य करते है, कि आप सफल होंगे और आगे बड़ेगे तो आप के साथ सब कुछ अच्छा ही होगा।
कॅरियर में सफलता
कॅरियर में सफलता
| आज के इस ग्लोबल युग में वे ही व्यक्ति सफल होते है जो गुणवान होते है। यदि हमारे अन्दर किसी चीज की योग्यता है तो ही हमारी मांग होगी। चाहे हम व्यापार करें या जॉब करें हमारा सकारात्मक रवैया, बातचीत का तरीका, बॉडी लैग्वेज, हमें सफलता दिलाता है । जो विद्यार्थी अपने कॅरियर में सफल होना चाहते है उन्हें अपने हॉबीज को स्कील में बदलना होगा। खाली समय मैं बिना दबाव के अपनी रूचि के साथ खुश होकर उत्साह से जिस कार्य को करना हम पसन्द करते है उसमें हमें दक्षता प्राप्त करना होगी। उदाहरण के लिये यदि हम ड्राईग बहुत अच्छी करते है तो उसमें निपुर्णता हासिल करें अलग अलग आकार के, अलग रगों के, विभिन्न स्थितियों के चित्र बनाने में दक्षता हासिल करें । फिर इसी गुण को लेकर हम डिजाईनिंग के अनेक क्षेत्रों में जा सकते है। आर्किटेक्ट बन सकते है, इन्टीरियर डिजाईनर बन सकते है, एनीमेशन और मल्टीमीडिया के क्षेत्र में जा सकते है, कार्टूनिस्ट बन सकते है। यदि हम बोलने में अच्छे है, तो हम स्कूल में होने वाले तत्कालिक भाषण, वाद विवाद प्रतियोगिताओं में भाग ले, ग्रुप डिस्कशन/ पब्लिक स्पीकिंग, सेमीनार प्रेजेन्टेशन मैें निपुणता हासिल करें, अपनी अंगे्रजी को बहुत अच्छी कर लें, फिर हम रेडियो जॉकी, वीडियो जॉकी, एन्कर, वकील, एविऐशन, होटल मेनेजमेन्ट काउन्सलर, आदि में अपना सफल कॅरियर का निर्माण कर सकते है। यदि हमारा सामान्य ज्ञान बहुत अच्छा है, वर्तमान में होने वाली घटनाओं पर हम अपने विचार रख पाते है,बोलने में अच्छे है तो हम पत्रकारिता के क्षेत्र में जा सकते है।यह सारे क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ठ संस्थान परीक्षाऐं लेते है और न्यूनतम अंकों के साथ इन्ही गुणों का आंकलन किया जाता है । अपने आप पर विश्वास रखते हुए हम जैसे सर्वश्रेष्ठ किसी एक गुण में दूसरे सभी से बेहतर है अपना आत्म विश्लेषण करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास सही दिशा में जब हम कर लेते है तो हम अपने कॅरियर में सफल हो जाते है । कभी कभी हमें तुरन्त सफलता मिल जाती है कभी हमें धैर्य और सकारात्मक रवैये के साथ लगातार आगे बढ़ना होता है बिना फल की चिन्ता किये लगातार अपने प्रयास करते रहे जितने भी सफल व्यक्तित्व हुए है इन सभी ने प्रयास किये है । अल्वर्ड ऑईस्टीन जो बचपन में बोल नही पाते थे बाद में सदी के सबसे बुद्धिमान वैज्ञानिक माने गये। सर ऑइसेक न्यूटन दो ही साल स्कूल गये माईकल फैराडे बुक बाईन्डर के यहां नौकरी करते थे वॉल डिजनी को ड्रांईग बनाना नही आता था विल गेट्स ने हॉवर्ड यूर्निवसिटी की पढ़ाई को अधूरा छोड़ा था, धीरूभाई अंबानी कक्षा 10 वीं फेल हो गये थे और भी ऐसे अनेक व्यक्तित्व है जिन्होने फल पर नही अपने कर्म पर ध्यान दिया सदैव वर्तमान क्षण में रहते हुए सर्वश्रेष्ठ सकारात्मक प्रयास किया। और अपने जीवन में सफल हुए विद्यार्थियों को बचपन में अपने कॅरियर का विजन स्पष्ट कर लेना चाहिए पूर्ण नियोजन के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते रहना चाहिऐ। वर्तमान समय में हमारी कम्युनिकेशन स्कील, बॉडी लेग्वेज, पॉजिटिव एटीट्यूट, लीडरशिप क्वालिटी, इंग्लिश कम्युनिकेशन, टीम स्पीरिट इन गुणों को हमारे कपड़े, शूज, हेयर स्टाईल, बिहेवियर सभी का बहुत ध्यान रखा जाता है। |
विद्यार्थीयों के लिए समय प्रबंधन
विद्यार्थीयों के लिए समय प्रबंधन
आज के समय में विद्यार्थीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, समय का प्रबंधन क्योकि विद्यार्थी जीवन के दौरान व्यतीत किया हुआ प्रत्येक सेकण्ड आने वाले समय में कई गुना परिणाम देने वाला होता है। जो विद्यार्थी क्षण-क्षण का उपयोग करते है, वे अपने जीवन में हमेशा सर्वश्रेष्ठ मुकामों को हासिल करते है। समय निरंतर आगे बढता रहता है। समय की गति न कभी कम होती है न कभी ज्यादा होती है न उसे हम रोक के रख सकते है वह तो एक जैसा हमेशा आगे बढता रहता है। यदि हम भी समय की गति के साथ आगे बढते रहते है। तो हम अपने आप को पहले से अधिक बेहतर पाते है और जीवन में उन्नति कर पाते है। समय प्रबंधन का सबसे सरल सिद्धांत यह है कि हम अपने आप को समय के साथ मैनेज करते चले और अपने लक्ष्य की तरफ बढते जाये । सबसे पहले तो हमारा विज+न स्पष्ट होना चाहिए कि हम क्या चाहते है? हमारा अगला कदम क्या होगा यह हमें पहले से ही मालुम होना चाहिए । यदि हम अपने कॅरियर के प्रति गंभीर है, जीवन में कुछ करना चाहते है, हमारे दोस्त अच्छे है, हमारी संगति अच्छी है, हमारे अंदर अच्छे विचार उत्पन्न होते है, हमारे आस-पास हमने सकारात्मक माहौल तैयार कर रखा है, तो निश्चित रूप से हम समय के महत्व को समझेंगे और अपने जीवन को बेहतर बनाने की तरफ कदम बढाऐंगे। जब हमारा विजन स्पष्ट है, हम हमारे कदमों को आगे बढा रहें है, तो हमें प्राथमिकता तय करनी होगी । किसी समय में हमारे पास चार तरह के कार्य है, तो हमारे लक्ष्य के अनुसार हमें उस कार्य को पहले करना होगा जो हमें हमारे लक्ष्य तक पहुचने में सीधे मदद करता है। ऐसे सभी कार्य, ऐसे सभी लोग, ऐसे सारे विचार, ऐसी सारी स्थितियॉ, जो लक्ष्य प्राप्ति में सीधे मदद नही करती है, उन्हें विनम्रता पूर्वक टाल दें या फिर नजर अंदाज कर दें। जानबुझ करके इन दूसरी चीजों में समय देकर हम अपने समय को नष्ट कर रहें होते है। समय हमारे पास सीमित ही है, असीमित नही है। अतः प्राथमिकता के आधार पर ही कार्य करें। अपने स्वास्थ्य पर जरूर ध्यान दे ऐसे सभी खाद्यपदार्थ, पेय पदार्थ, जो मन को चंचल बनाते हो शरीर में आलस्य का निर्माण करते हो सुपाच्य न हो हमारे शरीर को शक्ति देने के बताये शक्ति को चुसते हो खाने योग्य नही है। नियमित व्यायाम, घुमने जाना योग, प्राणायाम करना प्राकृतिक चिकित्सा करवाना निहायति जरूरी है। यदि हम शारिरिक रूप से स्वस्थ है तो हम समय प्रबंधन बहुत ही आसानी से कर लेते है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरूरी है। ज्यादा कल्पनाओं के जाल बुनने से, भूतकाल का पश्चाताप करने से, भविष्य के बारे में नकारात्मक सोचने से, अधिक मनोरंजन करने से, ज्यादा बोलने से, मानसिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है अतः इन सबसे बचे ध्यान एवं त्राटक के उपयोग से, वाद्य यंत्रों के संगीत से शास्त्रीय संगीत की धुनों से, ध्यान लगाने से अपनी चेतना को श्वास, प्रश्वास पर केन्द्रित करने से, अच्छा साहित्य पढने से, हमारा मन एकाग्र हो जाता है। हम अन्दर से अपने आप को स्थिर और सहज पाते है। जो कार्य हम पहले साठ मिनिट में करते थे वह कार्य अब हम पचास मिनिट में करने लग जाते है। इस प्रकार हमें कार्य करने के लिए अधिक घण्टे मिल जाते है हमारे पास एक हफ्ते में 168 घंटे होते है। हमारे पास एक दिन में 24 घंटे होते है जिसमें से 10 घंटों पर हमारा कोई नियंत्रण नही होता है किन्तु 14 घंटें हमारे पास प्रतिदिन होते है जिसमें हम कार्य करने योग्य होते है, इन 14 घंटों का सर्वश्रेष्ठ उपयोग हमें हमारे जीवन में बहुत आगे ले जायेगा स्कुल की पढाई स्कुल में करें स्कुल का होमवर्क स्कुल से आते से ही करले कोचिंग की पढाई कोचिंग में ही करें और कोचिंग का होमवर्क कोचिंग से आते ही करें। परीक्षा में सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने स्वअध्ययन कितना किया है।
कोचिंग और स्कुल के होमवर्क के अलावा जो आप स्वंय रिवाईज करते है याद करते है अपना खुद का टेस्ट लेते है कठीन चीजों को अतिरिक्त समय देते है इससे आप दूसरों से बेहतर अंक ला सकते है। 1 घंटें से लेकर 2 घंटों तक का स्वअध्ययन निहायति जरूरी है। स्कुल के अवकाश के दिन का उपयोग स्कुल के नियमित समय में ही पूर्ण करें जो आगे पढाया जाना है उसका पहले से ही तैयारी करें। कोचिंग के अवकाश का उपयोग कोचिंग के अतिरिक्त कार्यो को एवं जो पढाया जाने वाला है उसकों पूरा करने में अपना समय दे। यदि पहले का कुछ छुटा हुआ है तो उसे किसी मित्र या शिक्षक की सहायता से अवकाशवाले दिन करने की कोशिश करें। नियमित अध्ययन एवं प्रत्येक क्षण का स्वस्थ रहते हुए सर्वश्रेष्ठ उपयोग हमें प्रतियोगिता में सबसे आगे ले जाकर खडा कर देगा।
र्डिजायनिंग के टाप इंस्टीट्यूटस



